Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Full Best -

पुंडरीक गणधर प्रणमूं पाये, आदि जिनेश्वर राय।पांच करोड मुनिवर साधे, शिवरमणी वर थाय॥ १ ॥चैत्री पूनम दिन सोहामणी, सिद्ध भये मुनिराज।ते दिनथी ए तीरथ केरुं, पुंडरीक नाम सोहाज॥ २ ॥अष्टापद सम ए तीरथ मोटो, महिमा अपरम्पार।ए गिरि केरा कंकण वंदूं, पामूं भवनो पार॥ ३ ॥सुर नर किंकर सेवा साधे, भावे धरीने ध्यान।'विजय देव' कहे पुंडरीक स्वामी, आपो विमल ज्ञान॥ ४ ॥

भगवान आदिनाथ के परम गुणवान प्रथम गणधर पुंडरीक स्वामी की महिमा महान है। उन्होंने पाँच करोड़ मुनीश्वरों के साथ यहाँ अनशन (संलेखना) किया और शुक्ल ध्यान के प्रभाव से कर्मों का क्षय कर केवलज्ञान प्राप्त किया। चैत्र पूर्णिमा के दिन वे मोक्ष (महानंद पद) को प्राप्त हुए, जिससे इस पर्वत का नाम पुंडरीक गिरि प्रसिद्ध हुआ।

यह पाठ शत्रुंजय के मुख्य अधिपति, युग की शुरुआत करने वाले देवाधिदेव आदिनाथ प्रभु को समर्पित है। palitana 5 chaityavandan in hindi full

पुंडरीक स्वामी ने इसी पर्वत से मोक्ष प्राप्त किया था। विधि:

रायण हेठे पादुका, पूजीने आनंदो। जेनी अचिरा माय

इस पर्वत पर विराजमान आदिदेव भगवान ऋषभदेव की प्रतिमा और रायण वृक्ष के नीचे स्थापित उनकी चरण पादुकाओं की पूजा करके मेरा मन आनंदित हो उठता है। इस गिरिराज की महिमा अनंत है, जिसका पूरा बखान कोई नहीं कर सकता। चैत्र सुद पूर्णिमा (चैत्री पूनम) के दिन यहाँ की महिमा और भी अधिक बढ़ जाती है। मन में सच्ची भक्ति लाकर इस सुखदायक शत्रुंजय तीर्थ की सदा सेवा करनी चाहिए।

का विशेष महत्व है। ये चैत्यवंदन यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर किए जाते हैं विश्वसेन कुल उपन्यो

5. रायण वृक्ष (Rayan Vruksh) - पांचवीं चैत्यवंदन

शांति जिनेश्वर सुमरीए, जेनी अचिरा माय,विश्वसेन कुल उपन्यो, मृग लांछन पाय।गजपुरी नगरीनो धणी, कंचन वरणी छे काया,धनुष चालीशवार देहड़ी, लाख वरस नुं आया।

उत्तम संथो संजलणिज्जवाओ, अबहिलावो उत्तम उज्जोगकम्मं। आयरिय कंदं चरणं वरिद्धं, वंदामि पासेमि य णिच्चलं चैय।। तस्स चैयस्स, जं चैयलोगस्स, जाओ तेसिं चैयलोगाणं, अंतो बहिं पडिसंठियस्स, णमोत्थु णं णमोत्थु णं।।

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